छत्तीसगढ़ का एक ऐसा मंदिर जहां विराजती है 12 भुजाओं वाली माता

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*छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक  लाफागढ़ (चैतुरगढ़) का गौरवशाली इतिहास, 1097 मीटर ऊंचाई पर बसा है अजेय किला*

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विशेष संवाददाता- दिनेश श्रीवास, पाली से श्री न्यूज 36 गढ़ के लिए,,, पाली/कोरबा (छत्तीसगढ़)। कोरबा जिले के पाली तहसील में स्थित लाफा के पहाड़ पर बसा चैतुरगढ़ किला, जिसे लाफागढ़ के नाम से भी जाना जाता है, छत्तीसगढ़ के 36 गढ़ों में सबसे मजबूत और अजेय प्राकृतिक दुर्ग माना जाता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित यह किला समुद्र तल से 1097.5 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

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*भू-निर्देशांक और स्थिति*
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के बोर्ड के अनुसार इसका भू-निर्देशांक $22^{\circ}30’37”$ उत्तरी अक्षांश और $82^{\circ}16’17”$ पूर्वी देशांतर है। यह किला कोरबा से लगभग 70 किलोमीटर और पाली कस्बे से 21 किलोमीटर की दूरी पर, कोरबा-बिलासपुर मार्ग पर स्थित है। सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला और अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा होने के कारण यहां प्राकृतिक सौंदर्य भी अद्भुत है।

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*इतिहास और निर्माण*
इतिहासकारों के अनुसार इस किले का निर्माण 10वीं शताब्दी में कल्चुरी वंश के राजा पृथ्वीदेव प्रथम ने कराया था। कुछ साक्ष्यों में नागवंशी शासकों का भी उल्लेख मिलता है। पहाड़ी की भौगोलिक विशेषता के कारण इसे प्राकृतिक किला कहा जाता है, क्योंकि इसकी सुरक्षा के लिए प्राकृतिक खड़ी चट्टानें ही दीवार का काम करती हैं। इस कारण इसकी दीवारें आकार में अनियमित हैं।

*तीन ऐतिहासिक प्रवेश द्वार*
किले में प्रवेश के लिए तीन मुख्य द्वार हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में –
1.  *झंडी या डिंडा गेट*
2.  *मेनका दाई गेट*
3.  *हुंकारा या सिंहद्वार गेट* के नाम से जाना जाता है। ये द्वार सुंदर तराशी गई मूर्तियों से सुसज्जित हैं।

*महिषासुर मर्दिनी मंदिर है मुख्य आकर्षण*
किले के भीतर एक ऊंची जगती पर बलुआ प्रस्तर से निर्मित पूर्वाभिमुखी मंदिर देवी महिषासुर मर्दिनी को समर्पित है। यह मंदिर पंचायतन शैली में बना है, जिसमें एक वक्रीय शिखर के साथ गर्भगृह और स्तंभ युक्त मंडप है। गर्भगृह में 12 भुजाओं वाली महिषासुर मर्दिनी की दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। मंदिर के अलंकृत प्रवेश द्वार के ललाटबिंब पर भगवान गणेश की सुंदर प्रतिमा अंकित है। नवरात्रि में यहां हजारों श्रद्धालु ज्योति कलश और जंवारा लेकर दर्शन करने पहुंचते हैं।

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*पांच तालाब और शंकर गुफा*
पहाड़ी के ऊपर लगभग 5 वर्ग किलोमीटर के समतल क्षेत्र में पांच प्राकृतिक तालाब हैं, जिनमें से तीन में बारहमासी पानी भरा रहता है। मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर दूर प्रसिद्ध शंकर गुफा स्थित है, जो एक सुरंगनुमा गुफा है और लगभग 25 फीट लंबी है।

*पर्यटन और संरक्षण*
ASI द्वारा संरक्षित होने के बावजूद यह किला अभी भी पर्यटन की दृष्टि से पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों की मांग है कि यहां सड़क, बिजली-पानी और गाइड की बेहतर सुविधा विकसित की जाए ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को विश्व पटल पर पहचान मिल सके।

*रायपुर मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद* के अनुसार यह स्थल ऐतिहासिक और पारिस्थितिक दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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