संतोष श्रीवास पत्रकार मो 9098156126
बिलासपुर। अभी बरसात के मौसम में काम काज और व्यवसाय कम होता है और कही आप कम समय में घूमने का मन बना रहे हैं तो निश्चित ही घटारानी-जतमई ,0भूतेश्वर नाथ मंदिर गरियाबंद राजिम और चंपारण का एक यात्रा आपके लिए बहुत ही रोमांचक और उत्साह वर्धक हो सकता है। इसके लिए बरसात के तुरंत बाद ही जाना बढ़िया रहता है। क्योंकि इस समय मंदिर के किनारे स्थित नदी में जल का प्रवाह काफी तेज रहता है, जिसके कारण नजारा और भी बहुत ही सुहाना हो जाता है। गर्मी के मौसम में जाने पर केवल मंदिर का दर्शन होता है नदी नाले सूख चुके होते हैं तो थोड़ा वीरान सा लगता है। इसलिए आप जल्द ही बरसात और ठंड के शुरुआत में प्रकृति के साथ आध्यात्मिक यात्रा का लुत्फ उठा सकते है। जतमई से घटारानी के बीच जो शॉर्टकट जंगल के रास्ते पर रोड है वह पूरी तरह खत्म हो चुका है वहां से जाएं तो संभाल कर जाए बहुत ही खतरनाक गड्ढे हैं, सावधानी से यात्रा करें।
अगर पास से लेकर आठ व्यक्ति होते हैं तो स्कॉर्पियो, बोलोरो वगैरह अच्छा रहेगा अगर आप 15 से 20 होते हैं ट्रैवलर या छोटी बस या 30- 40 होते हैं तो बस से भी जा सकते हैं। अनुमानित खर्च लगभग ₹1500 प्रति व्यक्ति होता है। मेरे चाचा श्री रामकुमार श्रीवास व्याख्याता और समर्पित पदाधिकारी गायत्री परिवार के आदेश पर इस यात्रा की कुछ खास लिख रहा हूं,,,अगर आप के साथ भी 20से 25लोगों का एक ग्रुप है हम गाइड के साथ बेहतर यात्रा करा सकते हैं,,,,संतोष श्रीवास बिलासपुर 9098156126
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घटारानी मंदिर
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित है। यह खूबसूरत जलप्रपात राज्य की राजधानी रायपुर से लगभग 85से 90 किलोमीटर दूर घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल के रूप में जाना जाता है, जहाँ झरने के पास ही माँ घटारानी का प्रसिद्ध मंदिर भी है।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित घटारानी मंदिर (और पास का जतमई मंदिर) एक प्रसिद्ध धार्मिक और प्राकृतिक स्थल है। माना जाता है कि 16वीं शताब्दी में कमार जनजाति और स्थानीय आदिवासियों ने इस दिव्य वन देवी के स्थान को खोजा था। यहाँ माता रानी के चरणों को छूती हुई पानी की सुंदर धाराएँ बहती है।

गुफाएँ और किंवदंतियाँ: मंदिर परिसर के पास नाग गुफा और शेर गुफा जैसी रहस्यमयी गुफाएं हैं, जिनके बारे में स्थानीय लोगों में कई दैवीय चमत्कारिक कथाएं प्रचलित हैं। जतमई मंदिर से शॉर्टकट मात्र 6 किमी और घूमकर आने से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित एक बड़ा झरना हैं।

जतमई मंदिर
जतमई मंदिर में ज्यादा उत्साह और भक्ति के साथ नवरात्रि पर्व मनाया जाता है, यहाँ नवरात्रि की तरह विशेष उत्सव के मौकों पर एक सजावट देखतें बनता है। मानसून के बाद यह यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय है। मंदिर के निकट सुंदर झरना बहती है, जो इस जगह को और अधिक आकर्षक बना देता है झरना इस गंतव्य को पूरे परिवार के लिए एक पसंदीदा पिकनिक स्पॉट बनाने पूर्ण प्रवाह में है। झरना मंदिर में प्रवेश करने से पहले एक डुबकी लेने के लिए सबसे अच्छी जगह है कि एक प्राकृतिक पूल में डालता है। आसानी से सुलभ, वाहनों रायपुर, बिलासपुर से जतमई मंदिर के लिए उपलब्ध हैं।

प्राचीन मान्यता: स्थानीय कथाओं के अनुसार, जतमई माता की उत्पत्ति एक साधारण महिला के रूप में हुई थी, जिन्हें एक स्थानीय गड़ेरिया खाना खिलाया करता था। एक दिन उनकी पत्नी ने पीछे जाकर देखा और देवी पर शंका करते हुए क्रोधित हुईं, जिसके बाद माता मूर्ति के रूप में प्रकट हुईं।

निर्माण: इतिहासविदों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस प्राचीन मंदिर का मूल निर्माण लगभग 16वीं शताब्दी में यहाँ की स्थानीय कमार और बैगा जनजातियों द्वारा कराया गया था।

स्थापत्य कला: जतमई मंदिर मुख्य रूप से ग्रेनाइट पत्थर से तराश कर बनाया गया है। इसके मुख्य द्वार और शिखरों पर सुंदर पौराणिक नक्काशी व भित्ति चित्र बने हुए हैं।

भूतेश्वरनाथ महादेव (भुतेश्वरनाथ)
छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग गरियाबंद जिले के मरोदा (मरौदा) गांव में स्थित भूतेश्वरनाथ महादेव (भुतेश्वरनाथ) के रूप में प्रसिद्ध है। राजधानी रायपुर से इसकी दूरी लगभग 90-100 किलोमीटर है।

आकार: यह विशाल प्राकृतिक शिवलिंग जमीन से लगभग 85 फीट ऊंचा और 105 फीट गोलाकार है।मान्यता: स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस प्राकृतिक शिवलिंग का आकार हर साल थोड़ा-थोड़ा बढ़ता रहा है। अन्य नाम: इसे ‘भकुर्रा महादेव’ के नाम से भी जाना जाता है और छत्तीसगढ़ में इसे अर्द्धनारीश्वर शिवलिंग के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।


नोट: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के मयाली में स्थित मधेश्वर महादेव को भी पर्वत के रूप में सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग माना जाता है, लेकिन आकार और प्रसिद्धियों के मामले में गरियाबंद का भूतेश्वरनाथ प्रमुख है।)


