@ प्रेस क्लब बिलासपुर के पहुना कार्यक्रम में पहुंचे क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवननी ने बताई कई महत्वपूर्ण बातें
संतोष श्रीवास पत्रकार मो 9098156126
बिलासपुर। विद्यार्थी जीवन से राजनीतिक संगठन में सक्रिय होकर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष संगठनात्मक दायित्वों तक पहुंचने वाले जमीनी नेता और क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी ने रविवार को बिलासपुर प्रेस क्लब के पारंपरिक कार्यक्रम ‘पहुना’ में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने अपने जीवन परिचय, पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि, संगठनात्मक संघर्ष और विभिन्न दायित्वों के दौरान मिले अनुभवों को खुलकर साझा किया।
विपक्ष में भी रहकर संगठन के लिए कार्य किया
श्री सवन्नी ने बताया कि जनसंघ से पिता जी ने राजनीति किया और इस क्षेत्र में जनसंघ से प्रथम सरपंच बने थे। मेरा वार्ड अध्यक्ष से राजनीति की शुरुआत हुई। 1993 में पहली बार धरम भैया को टिकट मिला तो मैने उसमें संचालन किया। 1997 में बिल्हा मंडल का कार्यकारी अध्यक्ष बना। पहली बार प्रदेश महामंत्री 2010 में बना। 2013 में मुझे रिपीट किया गया। बड़ी चुनौती के साथ 30 लाख लोगों का आनलाइन सदस्य बनाने का काम बड़े आसानी से किया था। 2015 में हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन के साथ प्रवक्ता भी बनाया गया था। 2018 में विपक्ष में थे तब मुझे तीसरी बार महामंत्री भी बनाया गया। जब अरुण साव जी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बने थे तब अरुण साव जी के साथ मुझे उपाध्यक्ष बनाया गया। दुर्ग संभाग में कार्य करना बहुत चुनौती पूर्ण रहा। 30 अप्रैल 2025 को केड़ा के अध्यक्ष के रूप में कर रहा हूं। बिल्हा में आज तक जितना भी बड़ा बड़ा काम हुआ है बीजेपी सरकार आने के बाद हुआ है। ढाई वर्षों में साढ़े चार सौ करोड़ के कार्य स्वीकृत हुआ है।
संघ का प्रभाव शुरू से रहा है इस लिए राजनीति में आने का फैसला लिया।

जनसंघ का शुरू से प्रभाव रहा
सवन्नी ने कहा कि राजनीति में आगे बढ़ने की महत्वाकांक्षा हर व्यक्ति के भीतर होती है, लेकिन आगे की दिशा पार्टी के निर्णय और संगठन की जिम्मेदारी के आधार पर ही तय होती है। उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा का श्रेय अपने पिता स्वर्गीय इन्द्रसेन सवन्नी को देते हुए कहा कि उनके पिता बिल्हा क्षेत्र में जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में रहे और उनकी राजनीतिक सक्रियता ही उनके लिए प्रेरणा बनी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1987 में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सक्रिय रूप से पार्टी के लिए काम करना शुरू किया। उस समय बिल्हा में पहली बार जनसंघ की ओर से सरपंच निर्वाचित हुआ था। जीत के बाद निकली विजय रैली से प्रभावित होकर उन्होंने एक छोटे कार्यकर्ता के रूप में संगठन से जुड़कर काम शुरू किया। विद्यार्थी जीवन में भी उन्हें चुनावों के दौरान एजेंट के रूप में जिम्मेदारियां दी जाती थीं।


