प्राइमरी स्कूल से ही दी जाए संगीत की शिक्षा: पं. रामलाल बरेठ

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@ तबला पखावज की बन्दिश रायगढ़ घराने की है विशेषता

@ जीवन अंतिम दिनों तक संगीत की सेवा करना मेरा लक्ष्य

@ रायगढ़ कथक घराने के गौरव पद्मश्री पंडित रामलाल बरेठ को मिलेगा संगीत नाटक अकादमी का सर्वोच्च सम्मान “अकादमी रत्न”

@ बिलासपुर प्रेस क्लब में सम्मान समारोह, राष्ट्रपति द्वारा प्रदान की जाएगी प्रतिष्ठित फेलोशिप

संतोष श्रीवास पत्रकार मो 9098156126

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ और रायगढ़ कथक घराने के लिए गर्व का क्षण है। पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ कथकाचार्य पंडित रामलाल बरेठ को संगीत नाटक अकादमी की सर्वोच्च फेलोशिप “अकादमी रत्न” से सम्मानित किया जाएगा। यह प्रतिष्ठित सम्मान भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाएगा। रायगढ़ कथक घराने के एकमात्र जीवित दरबारी नर्तक पंडित रामलाल बरेठ ने अपनी आजीवन साधना और समर्पण से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में रायगढ़ घराने को नई पहचान दिलाई है। रायगढ़ में जन्मे पंडित रामलाल बरेठ ने राजा चक्रधर सिंह और अपने पिता पंडित कार्तिक राम के संरक्षण में कथक नृत्य की शिक्षा प्राप्त की। दशकों तक उन्होंने कथक की परंपरा को जीवंत रखते हुए देश और विदेश के प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। उनकी अथक साधना और योगदान ने रायगढ़ कथक घराने को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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पंडित रामलाल बरेठ ने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में रीडर के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके अलावा वर्ष 1981 से 2011 तक चक्रधर नृत्य केंद्र में गुरु के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने अनेक शिष्यों को कथक की शिक्षा प्रदान की। आज उनके शिष्य देश और विदेश में रायगढ़ घराने की समृद्ध परंपरा का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। पद्मश्री, चक्रधर सम्मान, शिखर सम्मान और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार जैसे अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित हो चुके पंडित रामलाल बरेठ के लिए “अकादमी रत्न” सम्मान उनके कला जीवन की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।

इस अवसर पर डॉ. विनय पाठक ने कहा कि पंडित रामलाल बरेठ ने रायगढ़ घराने, नृत्य, नाटक और संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है कि उनकी चार पीढ़ियां रायगढ़ घराने की परंपरा और ध्वज को आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि कथक की यह अनूठी परंपरा लखनऊ, जयपुर और बनारस घरानों के समन्वय की पहचान बन चुकी है।

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वहीं पूर्व आईएसएस अधिकारी डॉ. रमेशचन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि पंडित रामलाल बरेठ को एक और राष्ट्रीय सम्मान मिलना पूरे छत्तीसगढ़, बिलासपुर और रायगढ़ के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि पंडित बरेठ अपनी कला साधना के माध्यम से लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।

इस दौरान पंडित रामलाल बरेठ के पुत्र एवं रायगढ़ घराने के नर्तक और गुरु भूपेंद्र बरेठ ने अपने पिता के संघर्षपूर्ण जीवन और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगीत और नृत्य के क्षेत्र का यह सर्वोच्च सम्मान उनके पिता की दशकों की तपस्या और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस सम्मान से रायगढ़ घराने और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रतिष्ठा मिलेगी।

 

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