@ एक तरफ शासन कह कि पेड़ लगाओ, दूसरी तरफ विकास के नाम पर सैकड़ों पेड़ों की दी जा रही बलि
श्री न्यूज 36 गढ़। जशपुर। जिले के कुनकुरी वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत हर्राडांड के नवाटोली में सड़क किनारे स्थित गोठान के पास सैकड़ों बड़े पेड़ों की कटाई की जा रही है। इनमें साल सहित अन्य प्रजातियों के कुल 312 पेड़ शामिल हैं। मशीनों के माध्यम से हो रही इस कटाई को लेकर क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।



प्राप्त जानकारी के अनुसार, उक्त स्थल पर 400/132 केवी का विद्युत उपकरण स्थापित करने की योजना प्रस्तावित है। इस संबंध में कुनकुरी वन परिक्षेत्र के रेंजर से जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि यहां साल सहित विभिन्न प्रजातियों के 312 पेड़ों की कटाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित विभाग द्वारा विधिवत प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही पेड़ों की कटाई कराई जा रही है।

वर्जन
“इस संबंध में रेंजर श्री एस के होता ने बताया कि 400/132 उपकेंद्र हेतु हर्राडॉड में जमीन प्रस्तावित है, जो कि राजस्व क्षेत्र में आता है। विधिवत अनुमति मिलने के बाद ही पेड़ों कटाई की जा रही है। इसमें विभिन्न प्रजाति के पेड़ काटे जा रहे है।”
वर्षों की मेहनत से तैयार होते हैं पेड़
वहीं, स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि एक पेड़ को बड़ा होने में वर्षों लग जाते हैं। पौधे की देखभाल और संरक्षण के बाद वह विशाल वृक्ष का रूप लेता है, लेकिन मशीनों के जरिए कुछ ही मिनटों में उसे काट दिया जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, पेड़ों की कटाई से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को भी गंभीरता से समझने की जरूरत है।

पेड़ों की कटाई में लगे श्रमिकों ने बताया कि वे चोगरीबहार क्षेत्र के रहने वाले हैं और वन विभाग द्वारा यहां कटाई का कार्य कराया जा रहा है।

विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी
विद्युत परियोजना को क्षेत्र के विकास से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर चर्चा तेज कर दी है। सवाल यह है कि विकास कार्यों को आगे बढ़ाते समय क्या पेड़ों को बचाने के विकल्पों पर पर्याप्त विचार किया गया है? साथ ही, काटे जा रहे पेड़ों के बदले पौधरोपण और उनके संरक्षण की क्या व्यवस्था होगी?

विकास आवश्यक है, लेकिन प्रकृति और पर्यावरण की कीमत पर होने वाले विकास के दूरगामी प्रभावों पर भी विचार करना जरूरी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग परियोजना के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या कदम उठाता है।


