श्री न्यूज 36 गढ़। नई दिल्ली/धार्मिक डेस्क: सनातन धर्म में आस्था का महापर्व शारदीय नवरात्रि वर्ष 2026 में 11 अक्टूबर (रविवार) से शुरू होने जा रहा है। इस बार माता दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है, जिसे शास्त्रों में बेहद शुभ और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना गया है। नवरात्रि का यह पावन पर्व 19 अक्टूबर तक चलेगा और 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) मनाई जाएगी।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस साल घटस्थापना के लिए बेहद शुभ संयोग बन रहे हैं। आइए जानते हैं कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, विधि और अष्टमी-नवमी की सही तिथियां।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त (11 अक्टूबर 2026)
नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि को घटस्थापना की जाती है। इस वर्ष कलश स्थापना के लिए दो श्रेष्ठ मुहूर्त मिल रहे हैं:
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सुबह का मुहूर्त: 11 अक्टूबर को सुबह 06:19 बजे से सुबह 10:12 बजे तक (अवधि: 3 घंटे 53 मिनट)
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक (अवधि: 47 मिनट)
कलश स्थापना की सरल विधि
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वेदी तैयार करें: सबसे पहले पूजा घर में साफ मिट्टी के चौड़े पात्र में जौ (जवार) बोएं।
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कलश सजाएं: तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं। कलश में गंगाजल मिश्रित शुद्ध पानी भरें।
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सामग्री डालें: कलश के जल में एक सिक्का, सुपारी, हल्दी की गांठ और अक्षत डालें।
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पत्ते और नारियल: कलश के ऊपर आम या अशोक के 5 या 7 पत्ते रखें। नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के मुख पर स्थापित करें।
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संकल्प लें: माता दुर्गा का ध्यान करते हुए कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें और अखंड ज्योति प्रज्वलित करें।
महा अष्टमी, नवमी और कन्या पूजन कब?
इस साल तिथियों के उतार-चढ़ाव न होने के कारण व्रत की अवधि पूरी नौ दिनों की होगी:
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महा अष्टमी (मां महागौरी पूजा): 18 अक्टूबर 2026 (रविवार) – इस दिन कुल देवी की पूजा और कई घरों में कन्या पूजन किया जाएगा।
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महानवमी (मां सिद्धिदात्री पूजा): 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार) – नवमी के दिन हवन, कन्या पूजन और व्रत का पारण किया जाएगा।
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विजयादशमी (दशहरा): 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) – इस दिन मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन और रावण दहन किया जाएगा।
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