तखतपुर का एक ऐसा गांव, जहां मुक्तिधाम शेड है ना परिजन की बैठक मंच, कांटों के बीच शव जलाने मजबूर है ग्रामीण

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@ विधायक के घोषणा के बाद भी नहीं बन पा रहा मुक्तिधाम
@ चार पहिया वाहन के पहुंच से बाहर है मुक्तिधाम
@ मुक्तिधाम की जमीन पर बेजा कब्जा कर बन रहे मालदार

संतोष श्रीवास पत्रकार मो 9098156126
बिलासपुर। बड़े शहरों में आजकल मुक्तिधाम इतना सुंदर और भव्य बना हुआ है कि मरने से पहले जाने का मन बनता है। लेकिन गांवों की स्थिति को देखे तो ना तो मुक्तिधाम है और ना ही शेड की व्यवस्था है। मजबूरीवश मृत्यु होने पर जो परिजन मुक्तिधाम जाते है उसे कांटो के बीच बैठकर समय गुजरना पड़ रहा है।
तखतपुर विधानसभा के एक बड़े ग्राम खम्हारिया है जो तखतपुर बिलासपुर मुख्य मार्ग पर है काठानकोनी के पास स्थित है। चर्चा इस बात पर और हो रही है क्योंकि खम्हारिया के पास स्थित लाखासार में गत दिवस प्रदेश के मुखिया विष्णुदेव साय आए थे और गौधाम के साथ गौरव पथ की घोषणा किए है। विडंबना है पास स्थित गांव खम्हारिया में मुक्तिधाम शेड भी नहीं है। मुक्तिधाम को चारों ओर बेजा कब्जा किया जा चुका है। बेजा कब्जा के कारण मुक्तिधाम छोटा होते जा रहा है। कब्जेदार उसमें लगातार फसल उगा कर मालदार बन रहे है। जन सामान्य लोग अपने परिजन को ढंग से अंतिम संस्कार भी नहीं कर पा रहे है।

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बरसात में दोबारा जलाना पड़ जाता है : ग्रामीण
एक ग्रामीण ने बताया कि बरसात के दिनों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लगातार बारिश होने पर बारिश रुकने का इंतजार करना पड़ता है। जब बारिश रुकती है तब लाश को घर से निकलते है। वहीं कई बार ऐसा स्थिति निर्मित हुआ है एक बार लाश जलने के बाद बारिश हुई है, तो दोबारा लाश में आग लगाया गया है। यह भारी विडंबना है।
बाबुल के कांटो से आमजन रहते है परेशान
मुक्तिधाम में चारों ओर बाबुल के झाड़ी और पेड़ उगे हुए है। चारों तरफ कांटे ही काटे बिछे हुए है। सफाई का कुछ अता पता नहीं है कि कभी हुआ होगा। बरसात के दिनों में कांटे दिखाई ही नहीं पड़ते और लोग परेशान रहते है।

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विधायक भी है अवगत
तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह कुछ दिन पहले खम्हारिया गांव मंदिर के भूमिपूजन में आए थे, उन्होंने गांव की प्राथमिक समस्या को जल्द सुलझाने का वादा किया था लेकिन यथार्थ में आना बाकी है।

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बेजा कब्जा का शिकार है मुक्तिधाम
मुक्तिधाम को चारों ओर बेजा कब्जा किया जा चुका है। बेजा कब्जा के कारण मुक्तिधाम छोटा होते जा रहा है। कब्जेदार उसमें लगातार फसल उगा कर मालदार बन रहे है। जन सामान्य लोग अपने परिजन को ढंग से अंतिम संस्कार भी नहीं कर पा रहे है।
कोई सुनवाई नहीं हो रही : मनहरण कौशिक
जनपद सदस्य मनहरण कौशिक ने बताया कि हमने खम्हारिया और चनाडोंगरी के लिए मुक्तिधाम शेड सहित सौंदर्यीकरण के लिए जिला पंचायत सीईओ, जनपद सीईओ को प्रस्ताव दे दिया है। लेकिन आश्वासन के सिवाए कुछ और नहीं मिल रहा है। जबकि प्रत्येक गांव में कम से कम एक मुक्तिधाम अनिवार्य होना ही चाहिए। गांव की यह समस्या आमजन से जुड़ी हुई है लेकिन अधिकारी की कान में जु तक नहीं रेंग रही है।

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