सिम्स :: मरीज और परिजन हो जाए सावधान, फर्श से लेकर अर्श तक बीमारी ही बीमारी

- Advertisement -

@ सिम्स में काकरोच का है आतंक, फैलता है कई तरह की बीमारी

@ सिम्स में कहीं आपका इलाज डॉक्टर, नर्स के बजाय कॉकरोच से तो नहीं हो रहा

@ मरीज एवं परिजन ठीक होने के बजाय हो रहे बीमार

@ कर्मचारियों के दुर्व्यवहार से परेशान है मरीज और परिजन

समान रखने वाले बॉक्स में काकरोच ही काकरोच

संतोष श्रीवास पत्रकार मो 9098156126
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बड़े हॉस्पिटल सिम्स बिलासपुर में करोड़ों खर्च किए जा रहे है। लेकिन बीमारी फैलाने वाले काकरोच के रोकथाम में सिम्स प्रबंधन पूरी तरह नाकाम हो चुकी है। घटना दिनांक 15 नवंबर को जब हमारी न्यूज की टीम मेल मेडिकल वार्ड में पहुंची तो स्थिति गंभीर रही। हमें देखते ही कई मरीज और परिजन अपने अपने बेड एवं समान रखने की छोटी आलमारी को दिखाने लगे। नजारा देखकर हमारे होश उड़ गए। फर्श से लेकर टाइल्स लगे दीवाल पर काकरोच ही काकरोच नजर आ रहे आई। कुछ तस्वीर लिए और वीडियो भी बनाए।

काकरोच की शिकायत हमसे नहीं एमएस से करिए

अन्य मरीज के पास रखे हुए बॉक्स में भी काकरोच

मेल मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज ने बताया कि स्टाफ को जब काकरोच के आतंक के बारे में कहा गया तो उल्टा नाराज हो गई और कहा कि इसके लिए एमएस से शिकायत करिए। अपने बीमारी से परेशान मरीज और उनके परिजन को इस तरह का उत्तर मिलता है वह भी डांटने के अंदाज में। मरीज अपनी सलामती चाहता है इसलिए चुपचाप प्रबंधन को कोसते हुए वापस जाने के सिवाय कोई चारा नहीं बचता है। इंसानियत भी गरीब मरीजों के लिए मर चुकी है। फोटो देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि दवाई, समान रखने वाला बॉक्स, जमीन पर और टाइल्स पर अभी जगह काकरोच ही काकरोच है। *अब सवाल उठता है कि कितनी सफाई सिम्स में होती होगी, कितने स्टॉप सफाई में लगे हुए है, कितनी राशि सरकार सफाई पर करती है। यदि इतने लोग सफाई में लगे हुए है उसके बावजूद इतनी काकरोच बड़ी कैसे,,,? इतना काकरोच आ कैसे गया। प्रश्न यह भी उठता है कि काकरोच मारने वाली दवाई कब डाली गई थी, और क्या इसके बाद काकरोच मारने वाली दवा को डालना भूल गई है प्रबंधन।

नीचे फर्श पर छोटे छोटे काकरोच चलते रहते है,,

टूटी कुर्सी पर बैठने मजबूर परिजन

इस टूटे हुए स्टूल पर ऊपर के बिना वेल्डिंग का ढक्कन रख दिया जाता है, जिससे गिरने का खतरा बना रहता है,,

मरीज से मिलने आने वाले परिजन सिम्स की अवस्था का शिकार हो सकती है। लोहे के एंगल से बने स्टूल पर बिना वेल्डिंग के स्टील की टोपी ऐसे ही रख दी गई है। बैठते वक्त थोड़ी से लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

छोटी छोटी समस्या को भी हल नहीं कर पा रहा सिम्स प्रबंधन

पीली टंकी के सामने के दरवाजे की जर्जर स्थिति,,
दवाई में चल रहे काकरोच

पीली टंकी के सामने मुख्य मार्ग पर ही एक पुरानी दरवाजा है। जहां पर लोग थूकदान बना डाले है, इसे बढ़िया टाइल्स लगा दिया जाता तो वहां पर गंदगी कम होती पर इसे देखने वाला कोई नहीं है जिसके कारण लोग यहां पर थूकते है और पानी पेशाब तक डाल देते है।

Oplus_16908322

तस्वीर बयां कर रही हाल ए सिम्स
गरीब लोग मजबूरी में सिम्स पहुंच रहे है लेकिन कुछ माध्यम वर्गीय या उच्च वर्ग के लोग यदि पहुंच जाते है तो कर्मचारी लोग नाक मुंह बनाना शुरू कर देते है। मोटी रकम तनख्वाह पाने के बाद भी सेवा कार्य में रहते हुए मरीजों से दुर्व्यवहार के मामले लगातार होते आ रहा है। मोपका के एक मरीज के परिजन ने बताया कि ड्यूटी में कार्यरत कर्मी को मरीज को लगे बोटल खत्म होने को आ रहा था, जिसको बताने जब परिजन कर्मी के पास पहुंचे तो उसे ही चिल्लाने लगा। वहीं खैरा से आए हुए मरीज ने बताया कि मेरी पत्नी को बल्ड लगा हुआ था, बल्ड बहुत सारा चढ़ना बाकी था, फिर भी उसे फेक दिया गया। मुझे समझ नहीं आया। पर कर भी क्या सकता था।

Oplus_16908288
- Advertisement -
- Advertisement -
- Advertisement -
- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Advertisements
आपकी राय
मोसम का हाल
स्टॉक मार्केट
क्रिकेट लाइव
यह भी पढ़े
अन्य खबरे
- Advertisement -