मतांतरण के जाल में फंसता छत्तीसगढ़, हिंदू संगठनों के विरोध पर उबल रहा प्रदेश

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संतोष श्रीवास पत्रकार मो 9098156126
स्पेशल स्टोरी
बिलासपुर। बिलासपुर से बस्तर और रायगढ़ से कवर्धा तक सभी ओर इस समय प्रदेश भर में चंगाई सभा के माध्यम से ईसाई समाज धर्म प्रचार में लगे हुए है। बिलासपुर के रतनपुर के पास बंगलाभा ठा में नवनिर्मित चर्च का उद्घाटन और बस्तर के कालीपुर पंचायत में उसी दिन प्रार्थना सभा का आयोजन महज एक संयोग नहीं अपितु एक सोची समझी रणनीति मानी जा सकती है। इस बीच रायगढ़ जिले में भी घर के अंदर चर्च स्थापित कर मत अंतरण की बात आने के बाद हंगामा चल रहा है। मूलतः तमिलनाडु के ईसाई धर्म प्रचारक पाल दिनाकरन, जिसके 25 से अधिक ठिकानों पर 3 वर्ष पहले बड़े आयकर के छापे के बाद 118 करोड रुपए की अवैध संपत्ति की बात सामने आई थी। बिलासपुर के कोटा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव की विधायक निधि से वन विभाग की जमीन पर निर्मित चर्च का उद्घाटन हिंदू संगठनों के भारी विरोध के कारण फिलहाल टल गया है। गुस्साएं विधायक अटल श्रीवास्तव ने विरोध करने वालों को भगवाधारी गुंडा करार दिया है। साथ ही हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों को क्षेत्र के गांव में नहीं घुसने की चेतावनी भी दी है। उत्तरी छत्तीसगढ़ के ही जयपुर में मत्तांतरितों की 100 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला का हवाला देते हुए अटल श्रीवास्तव ने बिलासपुर में भी बड़े आंदोलन की धमकी दी है। इस बयान के बाद राजनीति में भूचाल सा मच गया है। हिंदू नेता और बीजेपी के विधायक सुशांत शुक्ला ने पलटवार करते हुए अटल श्रीवास्तव को कहा है कि किसी धर्म विशेष का समर्थन करना उचित नहीं है। साथ ही धमकियों से हिन्दू समाज डरने वाला नहीं है। कोटा से चुनाव हरने वाले प्रबल प्रताप सिंह जूते अपने समर्थकों के साथ विधायक द्वारा मतदान को राजनीतिक संरक्षण दिए जाने का आरोप लगाते हुए विरोध में खड़े हो गए हैं उन्होंने उग्र आंदोलन की धमकी दी है धार्मिक संगठन भी भगवाधारियों को गुंडा कहे जाने से उदयरित है उधर दक्षिणी छत्तीसगढ़ के बस्तर में भी मत अंतरण की आशंका से माहौल गर्म है। सड़क पर संघर्ष बढ़ता जा रहा है। मामला हाई कोर्ट के संज्ञान में भी है। ईसाई हर हाल में आयोजन करने पर अड़े हैं और आदिवासी एवं हिंदू संगठन माहौल बिगड़ने की आशंका जताते हुए विरोध कर रहे हैं। बस्तर जिले में  2011 से 2021 के बीच मत्तांतरितों की आबादी 6 गुना बढ़ जाने की रिपोर्ट भूपेश बघेल की सरकार को 3 वर्ष पहले ही मिल गई थी परंतु अब विष्णु देव राय की सरकार के समक्ष मत्तांतरण रोकने की चुनौती और गंभीर होने जा रही है। कांग्रेस नेताओं कम्युनिस्ट उग्रवादियों और ईसाई मिशनरियों की तिकड़ी आदिवासी समाज को हर स्तर पर मुख्य धारा से दूर करने में पूरे जोर-शोर से लग चुकी है। बस्तर संभाग में कम्युनिस्ट उग्रवादियों के कमजोर होने के कारण मिशनरियां अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हो रही है। समझा जा रहा है कि यही कारण है कि मत्तांतरितों के वोटो पर एकाधिकार समझने वाले कांग्रेसी नेताओं और मिशनरियों में भी बेचैनी बढ़ गई है।  रिपोर्ट के अनुसार मत्तांतरण में सहयोग करने वाले को ₹50000 तक पुरस्कार दिया जा रहा है बुजुर्गों को साथ जोड़ने के लिए मिशनरियों की तरफ से 500 से ₹1000 महीने तक की पेंशन दी जा रही है। रायगढ़ के जूट मिल थाना क्षेत्र के गांधीनगर इलाके में मत्तांतरण के मुद्दे पर फिर से विवाद खड़ा हो गया है पिछले 30 दिनों में रायगढ़ में मत्तांतरण का चौथा मामला है।

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